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नई दिल्ली : दिग्गज भारतीय जिम्नास्ट दीपा करमाकर के मेंटर और कोच बिशेश्वर नंदी ने कहा है कि उनकी शिष्या अगले महीने दोहा विश्व कप के बाद एक बार फिर प्रोडुनोवा वाल्ट की ट्रेनिंग शुरू करेंगी। दीपा ने 2016 रियो ओलंपिक में प्रोडुनोवा वाल्ट करके सुर्खियां बटोरी थी लेकिन 2017 में करियर को खतरे में डालने वाली चोट के बाद उन्हें इस ‘वाल्ट आफ डेथ’ को अपनी नियमित ट्रेनिंग से हटाने को बाध्य होना पड़ा। यह भारतीय हालांकि बाकू विश्व कप (14 से 17 मार्च) और दोहा विश्व कप (20 से 23 मार्च) के बाद एक बार फिर अपने पसंदीदा वाल्ट को शुरू कर सकती हैं। नंदी ने पीटीआई से कहा, ‘प्रोडुनोवा के लिए तीन से चार महीने की लगातार ट्रेनिंग की जरूरत पड़ती है जो नियमित क्वालीफाइंग प्रतियोगिताओं के कारण संभव नहीं है। मेरे दिमाग में यह बात थी और संभवत: दोहा से लौटने के बाद वह एक बार फिर प्रोडुनोवा पर काम शुरू करेगी।’

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उन्होंने कहा, ‘हमें इसे करने के लिए समय निकालना होगा। यह काफी मुश्किल वाल्ट है और वह पहले ही चोटों और सर्जरी से गुजर चुकी है। इसलिए यह जोखिम बन गया है इसलिए हमने इसे अब तक नहीं किया।’ दीपा को पिछले साल अप्रैल में सर्जरी करानी पड़ी थी जिसके बाद वह एशियाई चैंपियनशिप, कनाडा में विश्व चैंपियनशिप और आस्ट्रेलिया में राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाई। उन्होंने पिछले साल जुलाई में तुर्की में विश्व चैलेंज कप में स्वर्ण पदक के साथ वापसी की लेकिन घुटने में चोट के कारण जकार्ता एशियाई खेलों के वाल्ट फाइनल में हिस्सा नहीं ले पाई। इसके बाद वह टीम स्पर्धा से भी हट गई। पिछले साल दीपा ने जर्मनी के कोटबस में कलात्मक जिम्नास्टिक विश्व कप में कांस्य पदक के साथ तोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने की दावेदारी पेश की।

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दीपा ने जर्मनी में दो वाल्ट में 14.316 का औसत स्कोर बनाया और नंदी ने कहा कि इस भारतीय जिम्नास्टिक की तैयारी सही राह पर हैं। ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए दीपा की दावेदारी पर नंदी ने कहा, ‘‘इन विश्व कप के जरिए ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करना काफी मुश्किल है। अगर वह अगले तीन से चार टूर्नामेंट में स्वर्ण पदक जीत सकी तो उसके क्वालीफाई करने की पुष्टि हो जाएगी।’’  

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