स्पोर्ट्स डेस्क: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के सचिव देवजीत सैकिया ने IPL में बढ़ती रील कल्चर को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि बोर्ड सोशल मीडिया या रील्स के खिलाफ नहीं है, लेकिन खिलाड़ियों और फ्रेंचाइजियों को तय नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आज के दौर का हिस्सा है, लेकिन इसकी आड़ में किसी को भी टीम की गोपनीय गतिविधियों तक पहुंच की अनुमति नहीं दी जा सकती।
हाल ही में संपन्न IPL 2026 के दौरान BCCI ने फ्रेंचाइजियों को संभावित सुरक्षा जोखिमों और प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर एडवाइजरी जारी की थी। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सैकिया ने कहा कि बदलते समय के साथ सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ा है और क्रिकेट को भी इसके साथ तालमेल बिठाना होगा।
सैकिया ने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है, क्योंकि आपको तकनीक और समय के साथ लोकप्रिय हो रहे प्लेटफॉर्म्स के अनुसार खुद को ढालना पड़ता है।'
उन्होंने आगे कहा, 'जब 2008 में IPL शुरू हुआ था, तब सोशल मीडिया और इस तरह की चीजों के बारे में कोई नहीं सोचता था। लेकिन अब यही ट्रेंड है और हमें इसके अनुसार खुद को ढालना होगा।'
हालांकि BCCI सचिव ने साफ किया कि सोशल मीडिया कंटेंट बनाने की छूट का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति टीम मीटिंग, टीम बस, ड्रेसिंग रूम या अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश कर सके।
उन्होंने कहा, 'लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि किसी को टीम मीटिंग, टीम की गतिविधियों, बस या उन जगहों पर प्रवेश की अनुमति मिल जाए जहां अनधिकृत लोगों का जाना प्रतिबंधित है।' सैकिया ने जोर देकर कहा कि BCCI केवल यह सुनिश्चित करना चाहता है कि सोशल मीडिया गतिविधियां अपनी सीमाओं के भीतर रहें और IPL के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाए।
उन्होंने कहा, 'हम सिर्फ यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि सोशल मीडिया अपनी सीमा पार न करे और उन क्षेत्रों तक न पहुंचे जहां उसकी अनुमति नहीं है। ये गतिविधियां आगे भी बढ़ेंगी, लेकिन उन्हें IPL के नियमों और प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।' BCCI सचिव ने यह भी खुलासा किया कि IPL 2026 के दौरान एंटी करप्शन यूनिट (ACU) ने कुछ छोटी घटनाओं की जानकारी दी थी, जो भविष्य में बड़े विवाद का रूप ले सकती थीं। इसी कारण बोर्ड ने समय रहते सख्त दिशानिर्देश जारी किए।
सैकिया ने कहा, 'जब हमारी एंटी करप्शन टीम ने कुछ ऐसी छोटी-छोटी बातों की ओर ध्यान दिलाया जो आगे चलकर बड़े विवाद का कारण बन सकती थीं, तब हमने शुरुआत में ही कार्रवाई करने का फैसला किया। इसलिए विभिन्न प्रोटोकॉल उल्लंघनों की रिपोर्ट मिलने के बाद एडवाइजरी जारी की गई ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी को पहले ही रोका जा सके।'
BCCI का मानना है कि सोशल मीडिया और डिजिटल कंटेंट क्रिकेट का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन खेल की गरिमा, खिलाड़ियों की सुरक्षा और टीम की गोपनीयता से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।