नई दिल्ली : पाकिस्तान पिछले कुछ सालों से भारत के खिलाफ बड़े पैमाने पर ड्रोन का इस्तेमाल कर रहा है। ड्रोन का इस्तेमाल हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए किया जाता रहा है, खासकर पंजाब में। पिछले कुछ हफ्तों में सुरक्षा एजेंसियों ने लाइन ऑफ कंट्रोल (LoC) के पास ड्रोन देखे हैं। अगस्त में सीमावर्ती इलाकों में एक संदिग्ध पाकिस्तानी ड्रोन देखे जाने के बाद सुरक्षा बलों ने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में LoC के पास एक बड़ा सर्च ऑपरेशन चलाया था।
एक अधिकारी ने कहा कि ये ड्रोन हमले की योजना के तहत सीमावर्ती इलाकों में उड़ान भर रहे हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि इनका इस्तेमाल भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों की जानकारी इकट्ठा करने के लिए भी किया जा रहा है ताकि पाकिस्तान अपने उन आतंकवादियों की घुसपैठ करा सके जो लॉन्चपैड पर इंतजार कर रहे हैं। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी ने कहा कि पिछले कई महीनों में घुसपैठ के सभी पारंपरिक तरीके नाकाम रहे हैं। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के हालात, जहां पिछले तीन महीनों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं, भी ISI के मकसद में मददगार साबित नहीं हो रहे हैं।
अधिकारी ने कहा कि जो सुरक्षा बल आमतौर पर सीमावर्ती इलाकों में ध्यान भटकाकर घुसपैठ में मदद करते थे, वे भी PoK में चल रहे हालात में व्यस्त हैं। इसके अलावा आतंकवादियों के घुसपैठ न कर पाने के कारण उनमें निराशा बढ़ रही है। अधिकारी ने कहा कि उनमें से कुछ एक साल से भी अधिक समय से लॉन्चपैड पर इंतजार कर रहे हैं जिससे उनकी निराशा और मनोबल गिरने की समस्या और बढ़ गई है। अगस्त की घटना में सतर्क भारतीय सुरक्षा बलों ने ड्रोन पर गोलीबारी की, जिससे उन्हें पीछे हटना पड़ा।
पाकिस्तान बड़े पैमाने पर ड्रोन भेजना जारी रखेगा क्योंकि वह भारतीय सैनिकों की गतिविधियों और ठिकानों के बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए बेताब है। अधिकारियों का कहना है कि वे घुसपैठ के बिंदुओं के आसपास इन ड्रोन को अधिक तैनात करेंगे क्योंकि यह जानकारी आतंकवादियों को जम्मू-कश्मीर में घुसने में मदद करेगी। ड्रोन गतिविधियों में यह बढ़ोतरी LeT, JeM और हिज्बुल मुजाहिदीन के आतंकी आकाओं द्वारा ISI पर डाले जा रहे भारी दबाव के साथ भी मेल खाती है।
ये सभी आतंकी समूह जम्मू-कश्मीर में कोई बड़ी कार्रवाई करना चाहते हैं और कड़ी सुरक्षा के कारण वे अपनी योजनाओं में सफल नहीं हो पाए हैं। एक और अधिकारी ने बताया कि पाकिस्तान इन ड्रोन का इस्तेमाल भारतीय सैनिकों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में हथियार और गोला-बारूद गिराने के लिए भी कर रहा है। ISI जम्मू-कश्मीर में भी पंजाब वाली रणनीति अपनाने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ सालों से पंजाब को ड्रोन की बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
अधिकारी ने बताया कि नशीले पदार्थ और हथियार व गोला-बारूद गिराने के लिए सैटेलाइट से जुड़े बहुत एडवांस्ड ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि LoC के पास पाकिस्तान 'मीडियम एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस' (MALE) ड्रोन और तुर्की में बने 'बेरक्तार TB2' प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहा है। ये ड्रोन LoC के पास फॉरवर्ड सेक्टर में देखे जा रहे हैं। अधिकारियों के मुताबिक इन ड्रोन का मकसद सैनिकों की आवाजाही का पता लगाना और सीमा पार लॉन्चपैड पर मौजूद लोगों को रियल-टाइम कोऑर्डिनेट्स (सटीक लोकेशन) भेजना है।
भारतीय सैनिकों के बारे में जानकारी जुटाने के अलावा पाकिस्तान पिस्तौल, मैग्नेटिक स्टिकी बम, M4 कार्बाइन और ग्रेनेड गिराने की कोशिश भी कर रहा है। ये चीजें जम्मू-कश्मीर में स्थानीय आतंकी नेटवर्क के लिए हैं। ISI को अपना आतंकी नेटवर्क फिर से खड़ा करने के लिए स्थानीय लोगों को अच्छी तरह से हथियारों से लैस करने और विदेशी आतंकवादियों की घुसपैठ सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसी बेचैनी की वजह से ड्रोन की गतिविधियां बढ़ी हैं और इस बात की बहुत कम संभावना है कि आने वाले दिनों में इनकी संख्या और बढ़ेगी।