National

नई दिल्ली: गिरफ्तार आतंकी हैरिश मुश्ताक खान वर्ष 2017 से पहले एक होनहार स्टूडेंट था और उसने एक कार्यक्रम में अपने भाषण से यूनिवॢसटी के दिग्गजों का भी दिल जीता था, लेकिन एकाएक वह आतंकी विचारधारा की तरफ प्रभावित हो गया। स्पेशल सेल की जांच के तहत हरिश खान ओलवी की किताब और अब्दुला आलव की किताब को पढ़कर इतना प्रभवित हुआ कि उसने पढ़ाई को छोड़कर आतंकी बनने का रास्ता चुन लिया। इसी तरह असिफ सुहेल नादाफ भी जम्मू कश्मीर यूनिवॢसटी का होनहार छात्र रह चुका है, इसने भी इस संगठन को महज एक साल पहले ही ज्वाइन किया है। सेल के दावे के मुताबिक नादाफ भी इन्हीं किताबों की विचारधाराओं से प्रेरित हुआ है उसके बाद इसने ये रास्ता चुना। 

आंतकी हैरिस जामिया से कर चुका है पढ़ाई 
पकड़ा गया आतंकी हैरिश मुश्ताक खान 2013 से 2016 तक जामिया विश्वविद्यालय का छात्र रह चुका है, उसने जामिया से एमए इंटरनेशनल स्टडीज में किया है। लेकिन इसी दौरान वह आईएसआईएस के सम्पर्क में आ गया और पढ़ाई छोड़कर इस आंतकी संगठन में शामिल हो गया। बताया जा रहा है कि इस मॉड्यूल में करीब 12 आतंकी है जिसमें कई मारे और पकड़े गए हैं। इस ग्रुप का सरगना आदिल ठोकर है जिसकी तलाश अब की जा रही है, हाल ही में ग्रेटर नोएडा के शारदा विश्वविद्यालय का छात्र एहतिशाम बिलाल भी इसी मोड्यूल में शामिल था। स्पेशल सेल की टीम अब ये पता करने में जुटी है कि दिल्ली में ये लोग कहा कहा दहशत फैलाने वाले थे।

क्या होता है इन किताबों में? 
अल बगदादी की बनी आतंकियों की फौज में केवल एक महजब के लोग ही नहीं बल्कि अन्य देशों के कई धर्म से जुड़े लोग भी हैं। यही नहीं इन लोगों में इंजीनियर, प्रोफेसर सहित अपने अपने क्षेत्रों में किसी खास चीजों पर पकड़ रखने वाले लोग शामिल हैं। डीसीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा के मुताबिक हाल में सीआईए की रिपोर्ट आई थी जिसमें बताया गया था कि मौजूदा समय में बनने वाले आतंकी किसी कारण से नहीं बल्कि एक विचारधारा के आकर इस रास्ते को चुनते है। 

विशेष लड़कों को को पहले इंटरनेट से सम्पर्क में लाते हैं
रिपोर्ट के तहत ये लोग कुछ विशेष लड़कों को पहले इंटरनेट से सम्पर्क में लाते हंै और फिर कुछ किताबों को पढऩे के लिए कहते हैं,  जिसके बाद इन युवाओं की विचाराधराएं ही बदल जाती हैं। कुछ ऐसा ही हैरिश मुश्ताक खान और आसिफ सुहैल नादफ के साथ हुआ। स्पेशल सेल की भी जांच में आया है कि गिरफ्तार आतंक किताब ओलवी  किताब और अब्दुला आलम की किताब की विचारधारा से प्रेरित हुए। बताया जाता है कि ये आतंकी संठगन से जुडऩे और युवाओं का ब्रेनवॉश करने में यह किताब बहुत ही बड़ी मददगार होती है। इसके पढऩे और अध्ययन के बाद ज्यादातार युवा आतंकी संठगन में शमिल हो जाते हैं। यह किताब खिलाफत की बारे में बताती है और उनका पूरे विश्व के खिलाफ खिलाफत करने का आदेश होता है जो मुस्लिम राष्ट्र नहीं होते हैं। 

यह है आतंकियों को पकडऩे वाली टीम
एसीपी गोबिंद शर्मा, ललित मोहन, हृदयभूषण, इंस्पेक्टर सतीश राणा, सुनील राणा, रविंद्र जोशी और सब इंस्पेक्टर सुंदर गौतम आदि हैं।

.
.
.
.
.