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नई दिल्ली: भारतीय खिलाडिय़ों का मानना है कि अंडर-17 विश्व कप में सभी में जज्बा तो था लेकिन टूर्नामेंट के अनुभव की कमी स्पष्ट दिखायी दी जिससे देश ने फीफा की प्रतियोगिता में पहली बार प्रतिनिधित्व किया। मेजबान टीम ग्रुप चरण में ही टूर्नामेंट से बाहर हो गई, उसने अपने सभी तीनों मैच गंवा दिए। उन्होंने कोलंबिया को कड़ी चुनौती दी लेकिन उन्हें 1-2 से हार का सामना करना पड़ा। इसके अलावा उसे अमेरिका से 0-3 और घाना से 0-4 से पराजय मिली।

कप्तान अमरजीत सिंह ने कहा, ‘‘अनुभव काफी अच्छा था। हम दुनिया की शीर्ष टीमों के खिलाफ खेल रहे थे और घाना तो दो बार की चैम्पियन थी। हमने उनसे काफी कुछ सीखा।’’ उन्होंने कहा कि खिलाडिय़ों ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया लेकिन उनमें प्रतिस्पर्धा अनुभव की कमी थी जो उनके जीतने के जज्बे पर हावी हो गयी। अमरजीत ने कहा, ‘‘हमने टीम बैठकें की और हमने ठान लिया था कि हम शत प्रतिशत नहीं बल्कि 200 प्रतिशत देंगे। हम वहां जीतने के लिये गये थे क्योंकि हमें इतना समर्थन मिल रहा था और हम अच्छा करना चाहते थे और प्रशंसकों के सामने शानदार प्रदर्शन करना चाहते थे। लेकिन हममे अनुभव की कमी थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमने 10 साल का होने के बाद फुटबॉल खेलना शुरू किया लेकिन अन्य टीमों के खिलाडिय़ों ने पांच या छह साल की उम्र से खेलना शुरू कर दिया था।

इसलिस् इससे काफी फर्क पड़ता है। अब एआईएफएफ इस पर ध्यान लगा रहा है। एआईएफएफ की कई योजनायें हैं और मुझे लगता है कि भारत भविष्य के टूर्नामेंट में अच्छा प्रदर्शन करेगा।’’ अमरजीत ने यह भी कहा कि भारतीय खिलाड़ी थक गये थे और दो कड़े मुकाबले खेलने के बाद उन्हें छोटी चोटें भी लग गयी थीं। उन्होंने कहा, ‘‘घाना के खिलाफ मैच के अंत में हम थोड़े थके थे क्योंकि हम दो कड़े मुकाबले खेल चुके थे। यह खिलाडिय़ों के लिये मुश्किल था क्योंकि कुछ खिलाडिय़ों को चोटें थीं और कुछ की मांसपेशियों में ङ्क्षखचाव था।’’