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ज्यूरिख(निखलेश जैन): महान खिलाडिय़ों से सबसे बड़ी सीखने वाली बात उनके वापसी का जज्बा और उम्र की सीमाएं तोड़ता प्रदर्शन होता है। भारत के विश्वनाथन आनंद जो इस वर्ष 48 वर्ष के हो जाएंगे आज भी उनका उनकी उम्र से आधी उम्र के खिलाडिय़ों से मुकाबला करना आपको गर्व करने का अवसर देता है। 

खैर बात करें ज्यूरिख शतरंज के पहले दौर मतलब नए क्लासिकल मुकाबलों की जहां 45 मिनट के मैच खेले गए जो वैसे रैपिड की ही श्रेणी में आते हैं। आनंद ने शुरूआत की 4 में से 2 हार व 2 जीत के आंकड़ों को बेहतर करते हुए अंतिम 3 मैच में 2 जीत और एक ड्रॉ के साथ अंतत: तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया। 5वें मैच में उन्होंने अपने पुराने साथी और प्रतिद्वंद्वी इजराइल के बोरिस गेल्फेंड को पराजय का स्वाद चखाया तो अगले ही मैच में उन्होंने रूसी दिग्गज पीटर स्वीडर को परास्त किया।

7वें मैच में उनका मुकाबला प्रतियोगिता में सबसे आगे चल रहे अमरीका के नाकामुरा से था और उन्होंने एक समय उन पर भी बढ़त बना ली थी पर अंतत: नाकामुरा ने अच्छा बचाव किया और मैच ड्रॉ रहा। इस तरह नाकामुरा और रूस के इयान 10 अंकों के साथ क्रमश: पहले और दूसरे स्थान पर रहे, वहीं आनंद 9 अंकों के साथ तीसरे स्थान पर रहे, आनंद को हार का स्वाद चखाने वाले क्रामनिक 8 अंकों के साथ चौथे स्थान पर रहे।