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नई दिल्ली: क्रिकेटर युवराज सिंह बुधवार को न्यूज़ीलैंड सीरीज़ से पहले फिटनेस टेस्ट में एक बार फिर से नाकाम रहे। पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट टीम के लिए फिटनेस का मुद्दा अहम होता जा रहा है और आज का क्रिकेट 10 साल पहले खेले जाने वाले क्रिकेट से काफी बदल चुका है। चाहे आप कितने भी बड़े खिलाड़ी कयों ना हों और यहां तक की अच्छी फार्म में भी चल रहे हों लेकिन फिटनेस टेस्ट पास नहीं किया तो टीम में जगह बना पाना असंभव है। टेकनोलोजी का क्रिकेट में प्रभाव बढ़ चुका है और एक यो-यो फिटनेस टेस्ट कुछ खिलाड़ियों के लिए सरदर्द बन चुका है।

जानिए 'यो-यो फिटनेस टेस्ट' के बारे
यो-यो फिटनेस टेस्ट में 20 मीटर की दूरी पर दो पंक्तियां बनाई जाती हैं। खिलाड़ी लगातार दो लाइनों के बीच दौड़ता है और जब बीप बजती है तो उसे मुड़ना होता है। हर एक मिनट में तेजी बढ़ती जाती है और अगर समय पर रेखा तक नहीं पहुंचे तो दो और 'बीप' के अंतर्गत तेजी पकड़नी पड़ती है। अगर खिलाड़ी दो छोरों पर तेजी हासिल नहीं कर पाता है तो परीक्षण रोक दिया जाता है। BCCI के मुताबिक हर खिलाड़ी को इस टेस्ट में कम से कम 19.5 या इससे ज़्यादा अंक हासिल करने होते हैं ।

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आस्ट्रेलिया सीरीज़ से पहले भी टेस्ट में हुए फेल
युवराज सिंह और सुरेश रैना का आस्ट्रेलिया सीरीज़ के लिए चयन न होने पर उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर निराशा व्यक्त की। दोनों के बाहर होने के पीछे की वजह उनका प्रदर्शन नहीं बल्कि फिटनेस टेस्ट में फेल होना था। एक ओर जहां कोहली, जडेजा और मनीष पांडे जैसे खिलाड़ी लगातार 21 का आंकड़ा छूते है तो दूसरी ओर युवराज अभी बेंचमार्क भी नही छू पा रहे। 2019 विश्वकप को देखते हुए कोच रवि शास्त्री, कप्तान विराट कोहली और चयन समिति के अध्यक्ष एमएसके प्रसाद किसी तरह की कोताही बरतने के मूड में नहीं हैं और तीनों ने बोर्ड से भी साफ़ कह दिया है कि फिटनेस से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।