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नई दिल्ली: छतीसगढ की रहने वाली 18 साल की श्रद्धा वैष्वण की चर्चा  भले ही पूरे राज्य में क्यों न हो रही हो लेकिन उनके जीवन के संघर्ष का सच कोई नहीं जानता है। श्रद्धा के बोलने और सुनने की क्षमता 90% फीसद तक कम होने के बावजूद  उन्होंने हार नहीं मानी। वह पहली ऐसी दिव्यांग महिला है जो  राज्य की तरफ से लगातार क्रिकेट  खेलती आ रही है और साथ ही वह महिला छतीसगढ क्रिकेट  टीम के लिए भी चुनी गई हैं। श्रद्धा ने अपने जीवन का पहला कदम क्रिकेट के लिए 13 साल की उम्र में रखा था। तब वह मीडियम पेस गेंदबाजी किया करती थी। लेकिन बाद में वह अपने आप को और उभारने के लिए स्पिन गेंदबाजी भी करने लगी।

श्रद्धा को क्रिकेट खेलने का शौक टीवी में क्रिकेट खेलता देख शुरू हुआ। जिसके बाद श्रद्धा ने अपने भाई से क्रिकेट खेलने की इच्छा जताई और उसका भाई उसे क्रिकेट अकादमी ले गया।  श्रद्धा के कोच का कहना है कि वह हमेशा से ही मेहनती रही है वह जो भी काम करती है दिल से करती है। पहले तो वह गेंदबाजी की प्रैक्टिस करने लगी फिर धीरे -धीरे वह लेग- ब्रेक गेंदबाजी की तरफ  मुड़ गई।

श्रद्धा के जीवन का सफर अब बाकि लोगों के लिए भी प्ररेणा बन रहा है।  क्रिकेट अकादमी के ट्रेनर अनिल ठाकुर ने बताया कि श्रद्दा के ऐसे हौसले देखकर अब तो 15 साल  तक की लङकियां क्रिकेट खेल में रुचि दिखने लगी हैं। आज श्रद्धा बहुत लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन गई है।