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चेन्नई: आईपीएल सट्टेबाजी मामले में अपनी रिपोर्टों के कारण भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की ओर से 100 करोड़ रुपए के मानहानि के मामले का सामना कर रहे है जी टीवी ने आज मद्रास उच्च न्यायालय में खुद का बचाव करते हुए कहा कि उसने केवल एक निलंबित आईपीएस अधिकारी के बयान को दिखाया था। इस टीवी नेटवर्क ने खुद को जारी नोटिस पर अदालत में जवाबी हलफनामा पेश करके कहा कि उसकी रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय से नियुक्त मुदगल समिति के समक्ष दिए गए जी संपत कुमार के बयान पर आधारित थी।

 

धोनी ने आईपीएल मैचों में सट्टेबाजी, स्पाट और मैच फिक्सिंग में उनके शामिल होने संबंधी दुर्भावनापूर्ण समाचारों के कथित प्रसारण के लिये 100 करोड़ रूपये की मानहानि का दावा पेश किया है। जी टेलीविजन नेटवर्क ने इस बात का खंडन किया कि वह जानबूझकर धोनी की छवि खराब कर रहा है। उसने धोनी पर आरोप लगाया कि वह राष्ट्रीय और सार्वजनिक महत्व के विषय पर चर्चा करने से मीडिया को रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

 

अदालत ने 18 मार्च को जी न्यूज और न्यूज नेशन चैनल को धोनी की आईपीएल सट्टेबाजी और फिक्सिंग से जुड़ी खबर चलाने से रोक दिया था। यह आदेश दो सप्ताह के लिये प्रभावी था। अदालत ने उन्हेें नोटिस भी जारी किया था। धोनी ने अपने दावे में कहा था कि प्रतिवादी 11 फरवरी 2014 से मानहानि करने वाली तथा अपमानजनक झूठी रिपोर्ट और बयान प्रसारित कर रहे हैं। जी ने अपने जवाब में कहा कि धोनी क्रिकेट के खेल से बड़े नहीं हैं और उन्हें अभी तक मुदगल समिति से क्लीन चिट नहीं मिली है जिसने इस मामले में स्वतंत्र और पूर्ण जांच की सिफारिश की है।