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नई दिल्ली: टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का नाम आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग में घसीटा जा रहा है। लेकिन क्या धोनी इस मामले में शामिल हैं या नहीं। धोनी का दाहिना हाथ कहे जाने वाले अरुण पांडे ने एक टी.वी. चैनस के स्टिंग ऑपरेशन में इस राज से पर्दा उठा दिया है।

दुनिया भर के क्रिकेट में उस वक्त तूफान मचा जब आईपीएल में स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में एक-दो नहीं बल्कि तीन-तीन खिलाड़ियों को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया। इतना ही नहीं इस सनसनीखेज जांच के एक छोर पर क्रिकेट के बिग बॉस एन श्रीनिवासन के दामाद गुरुनाथ मयप्पन थे तो दूसरे छोर पर अंडरवरल्ड का बॉस दाऊद इब्राहिम।

क्रिकेट का कीचड़ धोनी पर भी उछला। ये नाम सिर्फ अखबारों की सुर्खियों और चैनलों की हेडलाइंस तक ही सीमित नहीं था बल्कि सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा। देश के बड़े वकील हरीश साल्वे ने भी धोनी पर बदनामी के बाण दाग दिए।

धोनी का दाहिना हाथ या यूं कहें कि धोनी के हर कारोबार का हमराज। जी हां, धोनी का इवेंट मैंनेजर अरुण पांडे। वो अरुण पांडे, जो खुद रणजी क्रिकेटर है और बाजार में धोनी का सांझीदार। अरुण पांडे वहीं हैं जिसने धोनी के कहने पर 2007 में भारत में स्पोर्ट्स इवेंट की सबसे बड़ी कंपनी बनाई। ये वही अरुण पांडे हैं जिनके पास सीएसके की मार्केटिंग राइट्स भी हैं और जिन्हें आप हर मुकाबले में धोनी की पत्नी साक्षी की बगल वाली सीट पर बैठे हुए देख सकते हैं।

पांडे ने कहा है कि अगर आप धोनी को दोष दे रहे हैं तो मैं आपको एक बात बता दूं। मैं जानता हूं उस आदमी को, वो ऐसा इंसान है जो गलत हो जाए तो अपने बाप का मर्डर कर दे। उसकी नजर में एक लाख रुपए हों या एक रुपया, दोनों ही घूस है। वे ऐसा नहीं कर सकते।

अरुण पांडे ने खुलासा किया कि सट्टेबाजी के इस खेल में सिर्फ खिलाड़ियों के नाम ही उछाले जा रहे हैं। उनका कहना था कि दरअसल श्रीनिवासन और ललित मोदी की लड़ाई में धोनी भी पिस रहे हैं।