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मीरपुर : भारतीय क्रिकेट टीम आई.सी.सी. ट्वंटी-20 विश्वकप में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर अपने अभियान का विजयी आगाज करने उतरेगी। इस मैच में जहां टीम इंडिया के लिए हर हाल में जीत दर्ज करने का दबाव होगा तो वहीं अपने अभियान की विजयी शुरूआत करने की दोहरी चुनौती भी होगी। भारतीय टीम कुछ ही दिन पहले बंगलादेश में ही आयोजित एशिया कप में पाकिस्तान के हाथों शिकस्त झेल चुकी है। ऐसे में साफ है कि विश्वकप का पहला मुकाबला न सिर्फ हाई-वोल्टेज होगा बल्कि टीम इंडिया पर पाकिस्तान के हाथों हार का बदला चुकता करने का भारी दबाव भी होगा।  टीम इंडिया पिछले काफी समय से खराब दौर से गुजर रही है लेकिन दूसरे और आखिरी अभ्यास मैच में उसकी इंगलैंड पर 20 रनों की जीत ने भारतीय प्रशंसकों की उम्मीदें जरूर बढ़ाई हैं। कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व और युवराज सिंह, सुरेश रैना तथा विराट कोहली की अच्छी फार्म से भी टीम पर भरोसा लौटा है।

हालांकि यदि चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान की बात करें तो ट्वंटी-20 प्रारूप में वह श्रीलंका के बाद दूसरी सर्वŸोष्ठ टीम है। वर्ष 2012 के बाद से टीम का प्रदर्शन काफी बेहतर हुआ है और उसका जीत एवं हार का अनुपात 1.80 है। लेकिन टूर्नामैंट के पहले संस्करण वर्ष 2007 की चैम्पियन टीम इंडिया को भी किसी हाल में कमतर नहीं आंका जा सकता। भारत की पूरी उम्मीद होगी कि इस बार भी वह इतिहास को दोहरा सके। भारत ने पहले संस्करण में पाकिस्तान को फाइनल मुकाबले में 5 रनों से पराजित कर खिताब पर कब्जा किया था।

दूसरी ओर भारतीय टीम ने पिछले अभ्यास मैच में इंगलैंड के खिलाफ जिस तरह से प्रदर्शन किया है उससे लग रहा है कि खिलाड़ी ट्रैक पर लौट रहे हैं लेकिन जबरदस्त फार्म में चल रही पाकिस्तान का सामना करने के लिए अब भी भारत को बल्लेबाजी और गेंदबाजी में बदलाव एवं सुधार की दरकार है। एशिया कप में इन्हीं परिस्थितियों में फ्लॉप साबित हुई टीम की ओपङ्क्षनग जोड़ी शिखर धवन और रोहित शर्मा अब भी खराब फार्म से बाहर नहीं निकल सकी है। पिछले मैच में दोनों बल्लेबाजों ने पहले विकेट के लिए 15 रन जोड़े। यदि इन बल्लेबाजों की यह फार्म मुख्य टूर्नामैंट में भी ऐसी रही तो पूरी टीम को इसका खामियाजा उठाना पड़ सकता है।