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बेंगलूर: इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) का सातवां संस्करण इस वर्ष खेल ही नहीं बल्कि इसके नए नियमों के कारण भी खासा अलग है जिसमें न सिर्फ पहली बार खिलाडिय़ों की नीलामी भारतीय मुद्रा में की गई बल्कि अनकैप्ड खिलाडिय़ों को भी नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया। आईपीएल के सातवें संस्करण में नीलामी प्रक्रिया में खिलाडिय़ों पर भारतीय मुद्रा में बोली लगाई गई जो टूर्नामेंट के इतिहास में पहली बार हुआ है।

इससे पिछले छह संस्करणों में भारतीय सहित सभी खिलाडिय़ों पर अमेरिकी डॉलर में ही बोली लगाई जाती थी। नए नियम के तहत भारतीय खिलाडिय़ों को रुपए में जबकि विदेशी खिलाडिय़ों को उनकी पसंद की मुद्रा में उस समय के रेट के मुताबिक भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा सीजन सात की खास बात यह है कि इस बार अनकैप्ड खिलाडिय़ों को भी नीलामी में शामिल किया गया है तथा नीलामी में शामिल खिलाडिय़ों की संख्या भी पहले के मुकाबले काफी अधिक है।

सातवें संस्करण में फ्रेंचाइजियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने के लिए नीलामी में 514 खिलाडिय़ों को शामिल किया गया है जिसमें 219 कैप्ड और 292 अनकैप्ड खिलाड़ी हैं तथा कैप्ड खिलाडिय़ों में शामिल 46 भारतीयों को दो करोड़ रुपए के सर्वाधिक बेस प्राइस पर रखा गया। 50 विदेशी खिलाडिय़ों में पहली बार एसोसिएट देशों के भी दो खिलाडिय़ों को शामिल किया गया जिनमें आयरलैंड के नील ओ ब्रायन तथा हालैंड के रेयान टेन डोएशाटे शामिल हैं।

साथ ही फ्रेंचाइजियों को पहली बार ‘जोकर्स कार्ड’ इस्तेमाल करने का मौका मिला है जिसके तहत वे उस खिलाड़ी को खरीद सकती हैं जिन्हें उन्हें राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर बरकरार नहीं रखा है लेकिन वह पिछले संस्करण में उनकी टीम का हिस्सा रह चुके हैं। नीलामी से पूर्व ही आठ फ्रेंचाइजियों ने इस बार अपने राइट टू मैच कार्ड का इस्तेमाल कर नियम के अनुसार अपने पसंदीदा खिलाडिय़ों को बरकरार रख लिया था जिन्हें फिर नीलामी में नहीं उतारा गया। टीमों को पांच पांच खिलाड़ी ही बरकरार रखने का अधिकार था और कुल 24 खिलाडिय़ों को फ्रेंचाइजियों ने बरकरार रखा।