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कराची: पाकिस्तान के दिग्गज खिलाड़ी इमरान खान ने क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था आईसीसी में सुधार की विवादास्पद योजना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि इससे यह खेल फिर से औपनिवेशिक दिनों में लौट जाएगा। क्रिकेट में वित्तीय रूप से मजबूत भारत, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड को शक्तिशाली बनाने के लिए आईसीसी ढांचागत बदलाव को मंगलवार को बोर्ड की बैठक में सैद्वांतिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।

पाकिस्तान की 1992 की विश्व कप विजेता टीम के कप्तान इमरान ने कहा कि इन प्रस्तावों से उन दिनों की याद ताजा हो गई जब इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के पास आईसीसी में वीटो का प्रभावशाली अधिकार था। इमरान ने कहा, ‘‘यदि मैं पीसीबी (पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड) का अध्यक्ष होता तो मैं इस नई औपनिवेशिक प्रणाली का कड़ा विरोध करता।’’ उन्होंने कहा कि दुबई में आईसीसी मुख्यालय में हुई बैठक ने उन्हें 1993 की बैठक की याद दिला दी जिसमें उन्होंने हिस्सा लिया था।

इमरान ने कहा, ‘‘तब भारत और पाकिस्तान की स्थिति एक जैसी थी और वे आईसीसी में साम्राज्यवाद को समाप्त करने के लिए लड़ रहे थे और इसको लोकतांत्रिक तरीके से चलाना चाहते थे।’’ उन्होंने कहा, ‘‘यह लोकतांत्रिक बन गया था लेकिन भारत अपने पैसों के प्रभाव तथा ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के समर्थन से इसे फिर से पुरानी स्थिति में लाना चाहता है।’’