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बीजिंग: चीन की स्टार टेनिस खिलाड़ी ली ना ने जब एक पखवाड़े पहले वर्ष के पहले ग्रैंड स्लैम ऑस्ट्रेलियन ओपन अभियान की शुरुआत की थी तो किसी को उनके चैम्पियन बनने की उम्मीद नहीं थी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, लेकिन 30 वर्षीय ली ने मेलबर्न पार्क में ऑस्ट्रेलियन ओपन की नई चैम्पियन बनकर अपना वादा पूरा कर दिखाया।

ली ना ने रविवार को हुए फाइनल मुकाबले में डोमीनिका सिबुलकोवा को 7-6(3), 6-0 से हराकर करियर में पहली बार ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब अपने नाम किया। इससे पहले ली ना के नाम तीन वर्ष पहले 2011 में जीता एकमात्र ग्रैंड स्लैम फ्रेंच ओपन था। अपनी जीत से ली ना ने उन लोगों के कयास पर विराम लगा दिया, जो कह रहे थे कि ली ना का सर्वश्रेष्ठ दौर बीत चुका है। ली ने साबित कर दिया कि अब तक उन्हें मिली सफलता अनायास नहीं थी। रोलां गैरो से मेलबर्न पार्क तक हालांकि ली का सफर इस कदर शोहरत से भरा नहीं रहा। इस दौरान ली को अनेक असफलताओं और तनाव से गुजरना पड़ा, जिसके कारण न सिर्फ उन्हें खुद अपनी प्रतिभा पर शक होने लगा था, बल्कि वह सन्यास तक लेने के बारे में सोचने लगी थीं।

ली को इस दौरान ग्रैंड स्लैम विजेता के रूप में खुद को स्थापित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक वर्ष से भी अधिक समय से ली एक भी खिताबी जीत दर्ज नहीं कर सकी थीं, जिसके कारण प्रायोजक और मीडिया ने भी उनसे लगभग दूरी बनानी शुरू कर दी थी। ऑस्ट्रेलियन ओपन-2012 के चौथे दौर में किम क्लिस्टर्स के हाथों हारने के बाद ली इतनी व्यथित हुईं कि वह रोते हुए संवाददाता सम्मेलन बीच में छोड़कर चली गईं।

ली ने अपनी आत्मकथा ‘डू जी शांग चांग’ (प्लेइंग माइसेल्फ) में कहा है, ‘‘मुझे एक अरब से भी अधिक लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना ही होगा, और यह आसान नहीं है।’’ ली के लिए 2012 के मध्य में पूर्व दिग्गज टेनिस स्टार जस्टिन हेनिन के पूर्व कोच कार्लोस रॉड्रिग्ज को अपना नया कोच नियुक्त करना उनके करियर का अहम कदम साबित हुआ। रॉड्रिग्ज ने ली के खेल में न सिर्फ तकनीकी सुधार किया बल्कि सबसे बढ़कर उनके खोए आत्मविश्वास को लौटाया। इसके बाद से ली ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। ली ने पिछले वर्ष का समापन तीसरी विश्व वरीयता के साथ की, तथा इस वर्ष की शुरु आत उन्होंने शेनझेन ओपन के अपने खिताब को सफलतापूर्वक बचाव कर किया।

ऑस्ट्रेलियन ओपन जीतने के बाद ली ने कहा, ‘‘पिछले वर्ष जब मैंने कहा था कि मैं शीर्ष तीन खिलाडिय़ों में पहुंचना चाहती हूं, तो किसी ने मुझ पर विश्वास नहीं किया था। और इस वर्ष की शुरुआत में जब मैंने कहा कि मैं एक और ग्रैंड स्लैम जीतना चाहती हूं तो लोगों ने मेरी हंसी तक उड़ाई। लेकिन सबसे बड़ी बात यह है कि मैंने अपने ऊपर विश्वास किया, रॉड्रिग्ज ने मुझमें विश्वास जताया।’’

ली ने कहा, ‘‘रॉड्रिग्ज रोज कहते ‘खुद पर विश्वास करो, खुद पर विश्वास करो’।’’