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हैमिल्टन : विदेशी जमीन पर लगातार खराब प्रदर्शन के कारण आलोचनाओं में घिरी भारतीय टीम यहां बुधवार को जब मेजबान न्यूजीलैंड के खिलाफ उतरेगी तो उसे जीत के लिए संयुक्त प्रयास कर अपनी कमजोरियों पर पार पाना होगा। नेपियर में मात्र 24 रनों के अंतर से मैच गंवा बैठी टीम इंडिया विदेशी जमीन पर खेल के लगभग हर विभाग पर खुद को साबित करने में नाकाम रही है। टीम के कुछ ही बल्लेबाज अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में कामयाब दिख रहे हैं जबकि बाकी सभी फ्लाप साबित हो रहे हैं। यही कुछ हाल उसका गेंदबाजी में भी दिख रहा है जिस कारण जीत के करीब पहुंचकर भी वह जीत से दूर है। कप्तान ब्रैंडन मैक्कुलम के नेतृत्व में मेजबान न्यूजीलैंड की टीम के लिए भारतीयों की कमजोरियां और साथ ही उन पर इस समय बने मनोवैज्ञानिक दबाव का फायदा उठाने का बेहतरीन मौका है जिसका वह हैमिल्टन में पूरा फायदा उठाएगी यह तय है इसलिए जरूरी है कि 5 मैचों की सीरीज में 1-0 से पिछड़ चुकी भारतीय टीम के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अपनी टीम को मुकाबले में लाने के लिए विशेष रणनीति का इस्तेमाल करें।

न्यूजीलैंड की जमीन पर भारत की जो कमजोरियां सामने उभरकर आई हैं उनमें शार्ट गेंदों को न खेल पाना है। बल्लेबाज तेज गेंदबाजी के सामने टिक कर रन नहीं बना पा रहे हैं और पिछले मैच को देखें तो युवा बल्लेबाज विराट कोहली की 123 रनों की शतकीय पारी और कप्तान धोनी के 40 रनों की पारी के अलावा और कोई भी बल्लेबाज जीत के लिए रन नहीं बना सका। ओपनर रोहित शर्मा और शिखर धवन की जोड़ी ने जहां भारतीय जमीन पर नए-नए रिकार्ड कायम किए वहीं ये बल्लेबाज मिलकर 3 और क्रमश: 32 रन ही बना सके। अजिंक्या रहाणे, सुरेश रैना और धोनी के पसंदीदा आलराऊंडर रवींद्र जडेजा ने पूरी तरह निराश किया।