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डरबन: भारतीय बल्लेबाजों ने दक्षिण अफ्रीकी आक्रमण के सामने आसानी से घुटने टेक दिए जिसकी बदौलत मेजबान ने दूसरे क्रिकेट टेस्ट में उसे 10 विकेट से हराते हुए श्रृंखला 1.0 से जीतकर जाक कैलिस को शानदार विदाई दी। विदेशी धरती पर भारतीय टीम की यह लगातार तीसरी हार है। सचिन तेंदुलकर के सन्यास लेने के बाद टीम इंडिया का यह पहला दक्षिण अफ्रीका दौरा था।

जानें: डरबन टेस्ट मैच में भारत को दक्षिण अफ्रीका से मिली करारी हार के पांच मुख्य कारण

दूसरे दिन लड़खड़ाए भारतीय बल्‍लेबाज:
जोहानिसबर्ग टेस्ट के बाद डरबन में पहले दिन सिर उठाकर भारतीय बल्लेबाज मैदान से बाहर निकले थे। पहले दिन का खेल खत्म होने के समय भारत का स्कोर एक विकेट पर 181 रन था। मुरली विजय (91) और चेतेश्वर पुजारा (58) क्रीज पर थे।

बारिश से बाधित दूसरे दिन खेल की शुरुआत लंच के बाद हुई तो भारत ने अभी महज 17 रन ही जोड़े थे। पहले 1 रन पर 3 विकेट निकल गए, फिर 14 रन पर 5 और फिर पूरी की पूरी टीम पहले दिन की शानदार बल्लेबाजी के बावजूद 334 पर आउट हो गई।

भारतीय गेमप्लान खराब:
तीसरे दिन दक्षिण अफ्रीका की हालत खराब थी। 113 रन पर 3 विकेट थे, लेकिन खराब भारतीय गेमप्लान ने शाम होते-होते ऐसी साझेदारी करा दी कि पासा पलटने लगा। फील्ड प्लेसमेंट बल्लेबाजों को नहीं, अपने गेंदबाजों को ही परेशान करने लगी थी। नतीजा ये था कि चौथे विकेट के लिए 127 रन की साझेदारी हो गई।

धोनी ने की गेंद बदलने में देरी:
भारतीय गेंदबाज खेल के तीसरे दिन जब अफ्रीकी बल्‍लेबाजों से पीट रहे थे तो इसके पीछे कप्तान धोनी का एक अजीबोगरीब फैसला भी कारण साबित हुआ। गेंद पुरानी होने की वजह से गेंद की रफ्तार धीमी थी और विपक्षी बल्लेबाज सहज तरीके से खेलते दिखे तथा बिना किसी चुनौती के मेजबान बल्‍लेबाजो ने रन बटोरे। धोनी ने 145 ओवर के बाद पुरानी हो चुकी गेंद को बदला। गेंद जब बदली गई तो उसकी दशा देखने लायक थी।

हो सकता है धोनी के पास इस फैसले के बचाव में ढेर सारे तर्क हों, लेकिन इस सवाल का क्या जवाब होगा कि उनका टालमटोल वाला ये फैसला 500 रन तक बनवा बैठा।

शिखर धवन नहीं खेले बेहतर:
विरोधी की 166 की बढ़त के बाद टीम इंडिया मुरली विजय को पहले ही गंवा बैठी थी। अब जरुरत हर कदम संभाल-संभालकर बढ़ाने की थी। जरुरत वक्त गुजारने की थी, लेकिन शिखर धवन को ना जाने किस बात की जल्दबाजी थी, वो अपनी ही जिद में थे। एक खराब शॉट दिन का खेल खत्म होने से पहले भारत की मुश्किलें और बढ़ा गया। शिखर धवन इस पूरी सीरीज में बेहतर खेल नहीं दिखा पाए।

आखिरी दिन बल्‍लेबाजों ने खेले खराब शॉट:
भारत को मैच बचाने के लिए आखिरी दिन टिककर खेलना था। आखिरी दिन जब खेल शुरू हुआ तब भारत का स्कोर था 68 रन पर 2 विकेट। टीम इंडिया की नई दीवार चेतेश्वर पुजारा भी अपना विकेट बचाकर नहीं रख पाए। शीर्ष क्रम की नाकामी के बाद मध्य क्रम के बल्‍लेबाजों के खराब शॉट ने भारत का खेल और बिगाड़ दिया।