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सचिन तेंदुलकर के 200वें और विदाई टेस्ट मैच के समय उनके सारे घनिष्ठ साथी वानखेड़े स्टेडियम पर मौजूद थे, ऐसे में सवाल उठता है कि सचिन के बचपन के साथी विनोद कांबली सचिन के विदाई देने स्टेडियम में क्य़ों नहीं आए? विनोद कांबली एक जमाने में सचिन के सबसे करीबी रहे हैं। वह मुंबई से हजारों मील दूर नोएडा में बैठकर अपने बचपन के सखा के आखिरी मैच का विश्लेषण कर रहे हैं। कांबली इस समय एक न्यूज टीवी चैनल के लिए एक्सपर्ट की भूमिका में हैं।

कांबली कहते हैं, ‘मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहता। हालांकि मैं जानता हूं कि क्रिकेट को विदा कहते हुए उन्हें बहुत दर्द हुआ होगा’ वह कहते हैं, ‘सचिन ने पिछले 30 सालों से केवल क्रिकेट खेली है, उन्होंने तो इसके अलावा कुछ सीखा ही नहीं। सन्यास का फैसला लेना उनके लिए कत्तई आसान नहीं रहा होगा।’

गौरतलब है कि कांबली और सचिन की दोस्ती उस उम्र से है जब दोनों 10 साल के थे और मुंबई के शारदाश्रम स्कूल में कक्षा सात के छात्र थे। दोनों की पहली मुलाकात रमाकांत आचरेकर की क्रिकेट कोचिंग में हुई थी।