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मुंबई: महिला निशानेबाज हिना सिद्धू ने जर्मनी के म्यूनिख में आईएसएसएफ विश्व कप फाइनल्स में स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रचा। वह भारत की पहली पिस्टल निशानेबाज हैं जिन्होंने इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सोने का तमगा हासिल किया। हीना ने कल फाइनल में चीन की ओलंपिक में दो बार की चैंपियन गुओ वेनजुन, सर्बिया की विश्व चैंपियन अरूनोविच जोराना और उक्रेन की कई ओलंपिक पदक जीतने वाली ओलेना कोस्तेविच को हराकर स्वर्ण पदक जीता।

महाराष्ट्र राइफल संघ की विज्ञप्ति के अनुसार इस प्रतियोगिता में इससे पहले अंजलि भागवत (2002) और गगन नारंग ने राइफल निशानेबाजी में स्वर्ण पदक जीते थे। आईएसएसफ विश्व कप फाइनल्स साल में एक बार आयोजित किया जाता है और इसमें दुनिया के चोटी के दस निशानेबाज भाग लेते हैं। हीना ने क्वालीफिकेशन में 384 अंक बनाए और उक्रेन की ओलेना के बाद तीसरे स्थान पर रही। वह हालांकि चीन की गुओ (नौवें) और सर्बिया की जोराना (छठे) से आगे रही। फाइनल में भारतीय निशानेबाज की शुरूआत अच्छी नहीं रही।

उन्होंने 9.3 और फिर 9.3 का स्कोर बनाया और पहले दो शाट के बाद आठवें स्थान पर खिसक गई। लेकिन इसके बाद उन्होंने
सही समय पर वापसी करके लगातार 15 सटीक निशाने लगाकर 5.2 अंक की बढ़त बना दी। इसके बाद भी उन्होंने ढिलायी नहीं बरती और अपना अच्छा प्रदर्शन जारी रखकर बढ़त में सुधार करती रही। हीना ने इस साल के शुरू में अर्जुन पुरस्कार विजेता अशोक पंडित के बेटे और राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले रौनक पंडित से शादी की थी।

 वह पटियाला से मुंबई में बस गयी हैं और अपने पति और कोच रौनक के साथ म्यूनिख गई थी। उन्होंने कोरिया और जर्मनी में इस साल अप्रैल और मई में हुए विश्व कप के जरिये फाइनल्स के लिये क्वालीफाई किया था। हीना ने अपने पति और कोच रौनक तथा विदेशी विशेषज्ञ अनातोली पिदुबनी की देख-रेख में पुणे में अभ्यास किया था। अनातोली ने हीना की तकनीक पर ध्यान दिया जबकि रौनक ने विषम परिस्थितियों में दबाव से निबटने के लिए रणनीति बनाने पर काम किया। विज्ञप्ति में कहा गया है कि प्रतियोगिता से पहले हीना की विश्व रैंकिंग नौ थी जिसमें अब सुधार होने की संभावना है।