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चेन्नई: विश्व शतरंज चैंपियनशिप में विश्वनाथन आनंद के अनुभव और मैग्नस कार्लसन की युवाशक्ति के बीच बाजी किसके हाथ रहेगी। यही विशेषज्ञों के बीच शह और मात का खेल बना हुआ है। भारत के 43 वर्षीय आनंद के पास लंबा अनुभव और पांच खिताब हैं जो शतरंज के प्रति उनके लगन और क्षमता का प्रतीक है, जबकि 22 वर्षीय कार्लसन पिछले कई वर्षों से नंबर एक पर काबिज हैं।

इस समय आनंद और बोरिस गोल फांड रूसी शतरंज स्कूल युग के आखिरी खिलाडी, जब शतरंज पर उसका दबदा था। इसमें गोल फांड उसी सकूल का हिस्सा रहे और आनंद बाहर के हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार आनंद ने अपने फिटनेस पर ज्यादा ध्यान दिया है। इतना ध्यान उन्होंने 25 या 30 वर्ष की उम्र में नहीं दिया था। वह 1990 के शुरूआती दौर में गैर सोवियत समूह के ध्वजवाहक बने, खासकर 1991-92 में रोगियो एमिलिया में, जहां 10 खिलाडियों में रूसी भाषा न बोलने वाले वह एक मात्र खिलाड़ी थे।

उसमें कास्पोरव और कार्पोंव भी थे। 21 वर्षीय आनंद ने उसमें जीत हासिल की थी जो विश्व शतरंज का अब तक की सबसे मजबूत प्रतियोगिता कहीं जाती है।