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हैदराबाद: देश की बैडमिंटन युगल विशेषज्ञ खिलाडी ज्वाला गुट्टा ने कहा है कि जब तक वह खेल को अलविदा नहीं कहती, तब तक उन्हें खेलने से कोई नहीं रोक सकता है। ज्वाला ने कहा कि वह अपने आसपास के माहौल से सीधे टकराना चाहती है क्योंकि वह चाहती है कि भविष्य में बैडमिंटन खिलाडी अन्याय और प्रताडना के खिलाफ संघर्ष कर सकें।

उन्होंने एक भीड भरे प्रेस कान्फ्रेंस में मुस्कराते हुए कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय जो निर्देश दिए हैं वह नैतिक जीत है। कोर्ट ने भारतीय बैडमिंटन संघ से कहा है कि उन्हें और अश्विनी पोनप्पा को डेनमार्क ओपन में भाग लेने दिया जाए। ज्वाला ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि बचपन से ही उनके कोच रहे द्रोणाचार्य एस एम आरिफ और पोनप्पा ने कहा कि पूरे प्रकरण के पीछे अकारण ही ज्वाला को प्रताडित करने की बात नजर आती है।

उन्होंने कहा कि कानूनी कोर्ट की बजाय वह बैडमिंटन कोर्ट में उतरना चाहती है। जब तक व्यवस्था में बदलाव नहीं होगा प्रतिभा के बावजूद कुछ खिलाडियों को मौका नहीं मिलेगा। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में उसके साथ खडे होने के लिए विमल कुमार, प्रकाश पादुकोण और क्लीन स्पोट्र्स इंडिया का आभार व्यक्त किया।