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लखनऊ: 1999 के एशियाई खेलों में सिल्वर मेडल दिलाने वाली मीनाक्षी रोजी-रोटी के इंतजाम के लिए आज दर-दर भटक रही हैं। आज मीनाक्षी की हालत ऐसी है कि उसके पास खाने के लिए अनाज तक नहीं है। मीनाक्षी नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही है, लेकिन उसकी सुनवाई कहीं नहीं होती। मजबूरी में आ कर मीनाक्षी ने शुक्रवार को नौकरी के लिए विधान भवन के सामने धरने पर बैठ गई।

उसके इस कदम ने प्रदेश में खिलाडिय़ों की स्थिति को एक बार फिर उजागर कर दिया। बरेली की रहने वाली मीनाक्षी ने 2007 से 2009 तक फिरोजाबाद में मानदेय पर वेटलिफ्टिंग की कोच रह चुकी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर 50 से ज्यादा मेडल जीतने वाली मीनाक्षी के पति और उत्तर प्रदेश वेटलिफ्टिंग टीम के कोच रहे दीपक सैनी का 2011 में एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। इस दुर्घटना में बुरी तरह से घायल मीनाक्षी के एक पैर में रॉड डालनी पड़ी थी।

इसके बाद से ही मानों उसके परिवार के बुरे दिन शुरू हो गए। इलाज में पैसे नहीं होने के कारण मकान तक बिक गया। आज उनका परिवार भुखमरी की कगार पर है। मीनाक्षी प्रदेश सरकार से नौकरी की मांग कर रही है इसको लेकर अब तक वह जनता दरबार में सीएम अखिलेश यादव से लेकर यूपी सरकार में खेल सलाहकार रामवृक्ष यादव तक से मिल चुकी है, मगर उसके हाथ सिर्फ आश्वासन ही लगे हैं।

मीनाक्षी बताती हैं कि उनके परिवार में उनके अलावा दो बच्चे हैं, जिसमें बेटा 10 साल का तथा बेटी पांच साल की है। उन्होंने बताया कि बहन थोड़ा बहुत मदद कर देती है, तो घर का काम चल जाता है। मगर वह भी कब तक मदद करेंगी।