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नई दिल्ली: विश्व कुश्ती प्रतियोगिता के ग्रीको रोमन वर्ग में भारत का पहला पदक जीतकर इतिहास बनाने वाले पहलवान संदीप तुलसी यादव दो महीने पहले ग्रीको रोमन छोड़कर रेलवे की अपनी नौकरी करने जा रहे थे। संदीप ने बुधवार को एक सम्मान समारोह में कहा ‘मैं प्रेक्टिस किया करता था लेकिन ऐन मौके पर चोट लग जाती थी। कभी हार जाता था तो मन में हताशा घुस गई थी।’

हंगरी के बुडापेस्ट में 66 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतने वाले संदीप ने कहा ‘जो स्थान फ्रीस्टाइल पहलवानों को मिलता था वह ग्रीको रोमन पहलवानों को नहीं मिलता था। इसे देखकर एक समय मेरे मन में आ गया था कि अच्छा हो कुश्ती छोड दूं और रेलवे में टीसी की अपनी नौकरी पर लग जाऊं।’

मुंबई के कांदीवली में साई सेंटर में अभ्यास करने वाले संदीप ने कहा ‘जब यह बात मेरे मन में घुस गई थी तब मेरे निजी कोच जगमाल सिंह ने कहा कि ऐसा मत सोचो। कम से कम विश्व चैंपियनशिप में आखिरी बार कोशिश करो।’

उन्होंने कहा ‘मुझे खुशी है कि मैंने इस कोशिश में कांस्य पदक हासिल कर लिया जिससे मेरा हौसला वापस लौट आया है और अब मैं 2016 रियो ओलंपिक में पदक जीतने के इरादे से उतरूंगा।’