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नई दिल्ली: ओलंपिक इतिहास के सबसे पुराने खेल कुश्ती की 2020 के ओलंपिक में वापसी पर समूचे भारत के कुश्ती जगत में जश्न मना, एकदूसरे को बधाइयां दी गई और अखाडों में मिठाइयां बांटी गई। अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) के ब्यूनर्स आयर्स में 125वें सत्र में रविवार को कुश्ती को जैसे ही ओलंपिक में बरकरार रखने का फैसला किया पूरे भारत में खुशी की लहर दौड गई।

भारतीय कुश्ती महासंघ, भारतीय ओलंपिक संघ, पहलवानों और अखाडों ने आईओसी के इस फैसले का दिल खोलकर स्वागत किया। बीजिंग और लंदन ओलंपिक में देश को तीन पदक देने वाले पहलवानों सुशील कुमार और योगेश्वर दत्त के गुरु महाबली सतपाल के छत्रसाल अखाडे और भारतीय कुश्ती के पितामह कहे जाने वाले गुरु हनुमान के अखाडे में पहलवानों ने एकदूसरे को बधाइयां दी और मिठाइयां बांटी।

द्रोणाचार्य अवार्डी महाबली सतपाल ने कहा ‘मुझे पूरी उम्मीद थी कि यह खेल ओलंपिक में बना रहेगा। दुनिया में पिछले कुछ महीनों में कुश्ती को बचाने के लिये जो अभियान छेडा गया था वह आखिरकार कामयाब रहा। हमने हुकम सिंह स्मृति दंगल में कुश्ती को बचाने के लिये जो दो मिनट की प्रार्थना की थी। उसका असर चौबीस घंटे के बाद ही सामने आ गया।’