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नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने दागी व्यक्तियों के भारतीय ओलंपिक संघ का चुनाव लडऩे पर रोक लगाने के अपने फैसले को बदलने से इंकार करते हुए कहा कि आईओए के ऐतराज को मानना ओलंपिक चार्टर की अहमियत कम करने जैसा होगा। आईओसी ने आईओए के संविधान का संशोधित मसौदा वापिस भेज दिया था।

आईओसी ने उन व्यक्तियों के आईओए का चुनाव लडऩे पर रोक लगाई है जिनके खिलाफ आरोप पत्र दायर हो चुका है। आईओए ने यह कहकर इस प्रावधान पर ऐतराज जताया था कि ऐसे मसलों में भारतीय कानून प्रभावी होगा।

आईओसी ने हालांकि आईओए के खिलाफ कार्रवाई की परोक्ष चेतावनी देते हुए कहा कि उस पर निलंबन पहले ही लगा हुआ है लिहाजा उसे आईओसी की शर्तें मानने के लिए जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। आईओसी ने एक पत्र में लिखा ,‘‘ आईओसी ने इस सिद्धांत पर कभी सवाल नहीं उठाया कि आरोपी साबित होने तक व्यक्ति निर्दोष रहता है। लेकिन आईओसी की आचार संहिता में साफ तौर पर लिखा है कि ओलंपिक से जुड़े पक्षों को आईओसी आचार संहिता का सम्मान करना चाहिए जिसमें लिखा है कि ऐसा कोई काम नहीं किया जाए जिससे ओलंपिक आंदोलन की साख को ठेस पहुंचे। आईओए अभी तक निलंबित है लिहाजा उसे जिम्मेदारी से काम करके संशोधित संविधान को अपनाना चाहिए ।’’