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नई दिल्लीः उम्र में धोखाधड़ी के आरोपों से वर्तमान राष्ट्रीय टेनिस चैंपियनशिप चर्चा में है क्योंकि 50 से अधिक ‘हतोत्साहित’ परिजनों ने एआईटीए के पास अनुरोध पत्र जमा करके इस जालसाजी को रोकने के लिये कड़े कदम उठाने के लिये कहा है।  अंडर-14 और अंडर-16 चैंपियनशिप के पहले दिन सोमवार को कुछ परिजनों ने अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) के सचिव के पास अनुरोध पत्र जमा किया जिससे यह आधिकारिक शिकायत हो गयी। इस पत्र पर 53 परिजनों के हस्ताक्षर हैं जिसमें आरोप लगाया गया है कि महासंघ चिंतित माता-पिताओं के ईमेल पर ध्यान न देकर उम्र में धोखाधड़ी के मामले को नजरअंदाज कर रहा है।   

जालसाजी को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की उम्मीद
इस पत्र में किसी खिलाड़ी का जिक्र नहीं किया गया है लेकिन महासंघ से आग्रह किया गया है कि इससे माता-पिता और बच्चे हतोत्साहित हैं और वे यहां तक कि खेल छोड़ रहे हैं। इस पत्र की एक प्रति के पास है। इसमें कहा गया है, ‘‘हम इस जालसाजी को रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की उम्मीद करते हैं। एआईटीए कम से कम इतना तो कर सकता है कि वह भारतीय बैडमिंटन संघ (बाई) द्वारा उम्र में धोखाधड़ी रोकने के लिये बनाये गये नियमों को अपनाये। ’’ एआईटीए के महासचिव हिरणमय चटर्जी ने माना कि इस तरह का चलन है और वे जल्द ही इसका समाधान निकालेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘ऐसी समस्या है और हम इससे वाकिफ है। हमारी कोलकाता में कार्यकारी समिति की बैठक होनी है और इस मसले पर विचार किया जाएगा। हम इसके लिये कोई व्यवस्था करेंगे जो सभी को स्वीकार्य होगा। ’’  चटर्जी से पूछा गया कि इस मामले से वाकिफ होने के बावजूद एआईटीएफ इतने वर्षों तक आंख मूंदकर क्यों बैठा रहा, उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है।   

चटर्जी ने कहा, ‘‘हमने राष्ट्रीय चैंपियनशिप में भाग लेने वाले खिलाडिय़ों के आयु सत्यापन के लिये नब्बे के दशक में चेन्नई में चिकित्सकीय परीक्षणों की व्यवस्था की थी। इसके बाद यह मामला धीरे धीरे सुलझ गया था लेकिन फिर से कई शिकायतें आ रही है इसलिए हमें इसका उन्मूलन करना होगा। ’’  एआईटीए नगर निगम के जन्म प्रमाणपत्र और पासपोर्ट की प्रति जैसे आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर खिलाड़ी का पंजीकरण करता है। अगर पासपोर्ट उपलब्ध नहीं हो तो स्कूल का प्रमाणपत्र जमा कर दिया जाता है। एआईटीए के सूत्रों ने स्वीकार किया कि पंजीकरण के समय और दो साल बाद इनके नवीनीकरण करने पर दस्तावेजों के सत्यापन की कोई व्यवस्था नहीं है।