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जालंधर (धवन): महेन्द्र सिंह धोनी की पहचान से कोई मोहताज नहीं है। बस कंडक्टर से विश्वस्तरीय क्रिकेटर बनने में धोनी के जीवन में सबसे क्रूर ग्रह माने जाते राहु ने अहम भूमिका अदा की। ज्योतिषी संजय चौधरी का कहना है कि धोनी का जन्म 7 जुलाई 1981 को रांची में हुआ था। कन्या लगन में जन्मे धोनी की कुंडली में गज केसरी योग लगन में ही विद्यमान है। खिलाड़ी की कुंडली में तीसरा स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है। तीसरे घर का स्वामी मंगल है तथा वह भाग्य स्थान में विराजमान है। 


9वें घर से वह अपने घर को देख रहा है, जिस कारण धोनी द्वारा बैटिंग के दौरान मारे जाने वाले शाट्रस काफी मजबूत होते हैं। इन्हें बार-बार कमैंटेटर्स हैलीकाप्टर शार्ट्स भी कहते रहे हैं। लगन के स्वामी बुध 10वें घर में आत्मकारक ग्रह सूर्य के साथ होने के कारण भारतीय रेलवे में भी सरकारी नौकरी धोनी ने की। 


उन्होंने बताया कि धोनी के जीवन में सबसे बड़ा परिवर्तन 2002 के अंत में आना शुरू हुआ, जब उन्हें राहु महादशा शुरू हुई। राहु चाहे क्रूर ग्रह माना जाता है तथा आम लोग राहु के नाम से भयभीत हो जाते हैं परन्तु आज के मुकाबलेबाजी वाले युग में राहु की अहम भूमिका हो गई है। अगर वह कुंडली में बेहतर स्थिति में है तो संबंधित व्यक्ति का जीवन कुछ ही समय में बदल जाता है जब राहु का समय शुरू होता है। धोनी के साथ भी ऐसा ही हुआ। राहु उनकी कुंडली में 11वें घर में शुक्र के साथ विराजमान है। शुक्र भाग्यभाव का स्वामी है। राहु महादशा शुरू होते ही क्रिकेट के क्षेत्र में धोनी का नाम चमकना शुरू हो गया। दिसम्बर 2004 में धोनी ने पहला एकदिवसीय मैच बंगलादेश के खिलाफ खेला। धोनी के जीवन में राहु के समय में लगातार अच्छे दिन आते गए। धन-शौहरत, विवाह सब कुछ राहु के समय में हुआ। वर्ल्ड टी-20 टूर्नामैंट जब भारत ने 2007 में जीता तो उस समय राहु महादशा में बृहस्पति की अन्तर्दशा चल रही थी। बृहस्पति जब जुलाई 2010 में धोनी के सातवें घर में आया तो उनका विवाह साक्षी सिंह रावत से सम्पन्न हुआ। 


2011 में जब भारत क्रिकेट में विश्व चैम्पियन बना तो उस समय धोनी को राहु महादशा में बुध की अन्तर्दशा व सूर्य की प्रत्यन्तर्दशा चल रही थी। सूर्य आत्मकारक ग्रह है तथा राजयोग में विराजमान है। राहु-शुक्र के समय में धोनी के घर में फरवरी 2015 में बेटी ने जन्म लिया। राहु की दशा 18 वर्ष चलती है। दशा के अंत में व्यक्ति कुछ लाभों से वंचित हो जाता है, इसलिए धोनी ने जनवरी 2017 में कप्तानी छोड़ दी। अगली महादशा बृहस्पति की होगी, जो 2020 में शुरू होगी। बृहस्पति चूंकि गुरु ग्रह है, इसलिए धोनी बृहस्पति की महादशा में एक सफल गुरु अर्थात कोच की भूमिका में आगे आ सकते हैं।