वो सात दिन सात साल के बराबर थे: दीपा करमाकर

Edited By ,Updated: 20 Sep, 2016 05:53 PM

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रियो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली जिमनास्ट दीपा करमाकर का देश भर में स्वागत का दौर चल रहा है लेकिन त्रिपुरा की दीपा आज भी उन क्षणों को याद कर रोमांचित हो उठती हैं

नई दिल्ली: रियो ओलंपिक में इतिहास रचने वाली जिमनास्ट दीपा करमाकर का देश भर में स्वागत का दौर चल रहा है लेकिन त्रिपुरा की दीपा आज भी उन क्षणों को याद कर रोमांचित हो उठती हैं जिन्होंने उनका पूरा जीवन बदल डाला। दीपा रियो ओलंपिक में अपनी वॉल्ट स्पर्धा के फाइनल के क्षण को याद करते हुए कहती हैं कि फाइनल में पहुंचने के बाद अगले सात दिन उनके लिए सात साल के बराबर थे। दीपा ने उस समय को जैसे दोहराते हुए कहा कि मैं जब फाइनल में पहुंची तो मेरे लिए वह एक ऐसा समय था जिसे मैं अपनी पूरी जिंदगी भूल नहीं सकती। 

मैं देश को पदक का तोहफा देना चाहती थी
उन्होंने कहा कि फाइनल में पहुंचने के बाद अगले सात दिन तो मेरे लिए ऐसा समय हो गया था कि मानो सात साल गुजर गए। फाइनल देश के स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर था और मैं देश को पदक का तोहफा देना चाहती थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा हो नहीं पाया। जब मैंने अपनी स्पर्धा पूरी की तो मैं दूसरे स्थान पर थी और उसी समय मुझे यह लग गया था कि मैं चौथे स्थान पर खिसक जाऊंगी। लेकिन मुझे खुशी थी कि मैंने भारतीय महिला जिमनास्टिक का इतिहास बदल दिया।

पूरे देश ने एक घंटे तक मेरे इवेंट को देखा
 दीपा ने साथ ही कहा कि मेरे लिए इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या हो सकती है कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्वसंध्या पर पूरे देश ने एक साथ एक घंटे तक मेरे इवेंट को देखा। इससे पहले तक जिमनास्टिक को बहुत कम देखा जाता था लेकिन उस दिन पूरे देश ने मुझे देखा। मेरे लिए यह जिंदगी का सबसे यादगार क्षण बन गया। बेशक मैं चौथे स्थान पर रही लेकिन 2020 के अगले ओलंपिक में मैं देश को जिमनास्टिक में पदक दिलाने का पूरा प्रयास करुंगी।
 

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