योग सांप्रदायिक नहीं: अमेरिकी कोर्ट

Edited By ,Updated: 04 Apr, 2015 05:48 PM

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अमेरिका की एक अदालत ने कहा कि कैलिफोर्निया के प्राथमिक विद्यालय में योग सिखाए जाने से हिंदुत्व का समर्थन...

लॉस एंजिलिस : अमेरिका की एक अदालत ने कहा कि कैलिफोर्निया के प्राथमिक विद्यालय में योग सिखाए जाने से हिंदुत्व का समर्थन नहीं हो रहा है और न ही छात्रों की धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लंघन होता है।  सैन डियागो की तीन सदस्यीय अपीलीय अदालत ने छात्रों के माता-पिता की आेर से दायर एक मुकदमे पर कल सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। उन्होंने शिकायत की थी कि अष्टांग योग की शिक्षा देकर एनसिनिटास जिले के एक स्कूल में हिंदू और बौद्ध मत को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।

अष्टांग योग को प्रोत्साहन देने वाले एक गैर लाभकारी समूह से तीन साल का अनुदान मिला है। इसके तहत जिले के 5600 छात्रों को 30 मिनट तक सप्ताह में दो बार योग सिखाया जाता है।  छात्रों के माता-पिता ने दलील दी थी कि स्कूल का योग कार्यक्रम आध्यात्मिक है और इसलिए असंवैधानिक है। अदालत के दस्तावेजों के अनुसार अदालत को यह निर्धारित करना है कि स्कूल का योग कार्यक्रम शारीरिक शिक्षा पाठ्यक्रम का घटक है या कैलिफोर्निया के संविधान का उल्लंघन करके धर्म की अस्वीकार्य स्थापना करता है।

 निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सैन डियागो की अदालत ने कहा कि किसी संदर्भ में योग की शिक्षा देना धार्मिक हो सकता है लेकिन जिले में जो योग सिखाया जा रहा है, जैसा निचली अदालत ने निर्धारित किया है कि वह किसी धार्मिक या आध्यात्मिक जाल से मुक्त है। योग 5000 साल पुरानी भारत की शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक परंपरा है जिसका लक्ष्य शरीर और मन का कायाकल्प करना है और इसकी अमेरिका के विभिन्न स्कूलों में शिक्षा दी जा रही है।

अदालत ने योग कक्षाओं के वीडियो का अंश भी देखा जिन्हें पारंपरिक जिम कक्षाओं के विकल्प के तौर पर सिखाया जा रहा है। न्यायमूर्ति सिंथिया एेरॉन ने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि कार्यक्रम उद्देश्य में धर्मनिरपेक्ष है। इसका धर्म को आगे बढ़ाने या रोकने पर प्राथमिक प्रभाव नहीं है और जिला स्कूल धर्म में अधिक नहीं उलझाता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए, हमारा निष्कर्ष है कि निचली अदालत ने सही निर्धारण किया कि जिले का योग कार्यक्रम हमारे राज्य के संविधान का उल्लंघन नहीं करता है।’’ स्टीफन और जेनिफर सेडलॉक और उनके दो बच्चों ने मुकदमा दायर किया था और कहा था कि वे फैसले से निराश हैं और अन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।

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